वर्षों से गोचर भूमि पर दबंगों का कब्जा, कब्जाधारियों से गोचर भूमि मुक्त करने में प्रशासनिक मशीनरी असफल।



वर्षों से गोचर भूमि पर दबंगों का कब्जा, कब्जाधारियों से गोचर भूमि मुक्त करने में प्रशासनिक मशीनरी असफल।

रतलाम/नामली - प्रदेश सरकार तो अच्छा काम कर रही है कि शासकीय सम्पत्ति और शासकीय भूमियों पर कब्जा जमाए बैठे कब्जेधारियों पर कार्रवाई हो साथ ही सरकारी भूमि या सम्पत्ति मुक्त हो। मगर मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की नामली नगर परिषद से लगी शासकीय भूमियों पर कब्जाधारियों पर कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। इसको लेकर एक उदाहरण सामने आया है नामली के पास भारोड़ा पंचायत के मध्य श्री गोपाल गौशाला वर्षों से संचालित है गौशाला के आसपास करीबन 65 बिघा गोचर भूमि पर वर्षों से दबंगों का कब्जा है इसको लेकर समाजसेवी बंटी डाबी ने करीबन 3 वर्षों पहले गोचर भूमि दबंगों से मुक्त कराकर श्री गोपाल गौशाला को अधिकृत करने की मांग जन सुनवाई में कलेक्टर से की थी उसके बाद प्रशासन के जिम्मेदार नुमाइंदे जागें और गौशाला के आसपास की गोचर भूमि की नपती की गई जिसमें तत्कालीन राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। करीबन 65 गोचर भूमि की नपती के बाद विषय यह आया था कि कब्जेधारियों की फसल कटने के बाद कब्जेधारियों से गोचर भूमि मुक्त करवा ली जाएगी मगर ऐसा हो नहीं पाया और पिछले तीन साल निकल गए।

सुत्रो द्वारा बताया जाता है कि गोचर भूमि पर कब्जेधारी राजनीतिक रसूखदार लोग है इसलिए स्थानीय अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं। गौरतलब है कि बुधवार को नामली थाने के बांगरोद गांव में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन कब्जेधारियों से मुक्त करवाई गई  मगर स्थानीय अधिकारियों की निगाह गोपाल गौशाला के आसपास की 65 बिघा जमीन पर नहीं गई है। 


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नामली नगर के आसपास शासकीय जमीन पर है लोगों का कब्जा ।


रतलाम जिले का प्रशासन सरकारी जमीनों से कब्जा मुक्त करने की कार्रवाई नामली नगर के आसपास लगी सरकारी जमीनों पर कार्रवाई को लेकर कोई पहल करें तो आसपास कई सरकारी जमीनों पर कब्जेधारियों का वर्षों से कब्जा है और वह बैख़ोफ होकर खेती कर रहे हैं। और मुनाफा कमा रहे है। राजस्व विभाग के रिकार्ड में ऐसी बहुत सारी सरकारी जमीन है जिन पर कब्जा आज भी बरकरार है।
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