खाकी' पर प्रहार की साजिश? जुआ माफिया के निशाने पर बांगरोद चौकी प्रभारी, निष्पक्ष कार्रवाई को रोकने के लिए रचा जा रहा 'शिकायत' का चक्रव्यूह।

खाकी' पर प्रहार की साजिश? जुआ माफिया के निशाने पर बांगरोद चौकी प्रभारी, निष्पक्ष कार्रवाई को रोकने के लिए रचा जा रहा 'शिकायत' का चक्रव्यूह। 

रतलाम (ब्यूरो) मध्यप्रदेश 
 
अपराध और अपराधियों के विरुद्ध जब पुलिस सख्ती दिखाती है, तो अक्सर पलटवार के रूप में 'शिकायत' का हथियार इस्तेमाल किया जाता है। ताजा मामला नामली थाना क्षेत्र की बांगरोद चौकी का है, जहाँ एक सक्रिय पुलिस टीम को बदनाम करने और चौकी प्रभारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का खेल कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा खेला जा रहा है।संयुक्त कार्रवाई से बौखलाया जुआ माफिया बीते दिनों सांवरिया रेस्टोरेंट पर हुई बड़ी कार्रवाई, जिसमें कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सहित नौ जुआरियों को रंगे हाथों दबोचा गया, उसने क्षेत्र के अवैध धंधेबाजों की कमर तोड़ दी है। उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई नामली थाना प्रभारी गायत्री सोनी के नेतृत्व में चौकी और थाने की संयुक्त टीम द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ की गई थी। इस सफल दबिश के बाद अब वही तत्व सक्रिय हो गए हैं, जिनके हितों पर पुलिस ने चोट की है। नए प्रभारी, पुरानी रंजिशें सूत्रों की मानें तो बांगरोद चौकी प्रभारी को कमान संभाले अभी महज एक माह का समय हुआ है। किसी भी नए अधिकारी को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और असामाजिक तत्वों के नेटवर्क को समझने में समय लगता है। इसके बावजूद, चौकी प्रभारी द्वारा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन एक पक्ष, जो पुलिस की निष्पक्षता से घबराया हुआ है, पुरानी शिकायतों और आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर चौकी प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।
पुलिस की नौकरी: 'टेढ़ी खीर' और दोधारी तलवार
पुलिस के लिए समाज में संतुलन बनाए रखना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। जब पुलिस कार्रवाई करती है, तो आरोपी पक्ष उसे 'एकपक्षीय' बताकर विरोध शुरू कर देता है। बांगरोद के मामले में भी यही हो रहा है। प्रधान आरक्षक पर हुई कार्रवाई को आधार बनाकर अब सीधे चौकी प्रभारी को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि पुलिस का मनोबल टूटे और अवैध गतिविधियों के लिए मैदान खाली मिल सके।
क्या है हकीकत?
थाना प्रभारी गायत्री सोनी ने स्पष्ट किया है कि पुलिस की कार्रवाई सूचना और तथ्यों के आधार पर होती है। बांगरोद क्षेत्र में सट्टे और जुए के खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई है और आगे भी जारी रहेगी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब चौकी प्रभारी और उनकी टीम ने खुद दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा, तो उन पर मिलीभगत के आरोप कितने तर्कसंगत हैं?
पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों को यह समझना होगा कि यदि दबाव में आकर फील्ड अधिकारियों को हटाया गया या हतोत्साहित किया गया, तो इससे केवल अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे। बांगरोद की जनता अब यह देख रही है कि जीत 'कानून' की होती है या 'साजिश' रचने वाले जुआरियों की।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

लेन-देन या साजिश? युवक की मौत पर नामली थाने के सामने लाश रखकर प्रदर्शन, हत्या के आरोप में पांच नामजद।

नामली में जुए पर दोहरी कहानी! गोदाम से छोड़े गए जुआरी,जंगल में दिखाई गई ‘सख्त’ कार्रवाई— पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल।

रहस्यमय मौत: शिवम राठौड़ की मौत पर उठ रहे हैं गहरे सवाल।