नामली नगर परिषद की सरकारी भूमि पर कब्ज़े का खेल: PM आवास के गरीब हितग्राही दर-दर भटकने को मजबूर, मारपीट के बाद गरमाया माहौल।


नगर परिषद नामली के वार्ड क्रमांक 6 में राजस्व विभाग और नगर परिषद की बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्ज़े को लेकर भू-माफियाओं और रसूखदारों द्वारा तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा उन गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पक्का मकान मिलना स्वीकृत हो चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में आवास निर्माण की प्रथम किस्त की राशि जमा हुए भी कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन ज़मीन पर अन्य लोगों का अवैध कब्ज़ा होने के कारण पीड़ित परिवार अपने सपनों का आशियाना बनाने के लिए एक-एक ईंट को तरस रहे हैं।
अधिकारियों की चौखट पर घिस रहे चप्पल, CMO मौन।
पीड़ित परिवार पिछले कई महीनों से न्याय की गुहार लेकर प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। एक बेबस महिला न्याय की आस में लगातार एसपी (SP) ऑफिस और जनसुनवाई के फेरे लगा रही है, लेकिन नतीजा सिफ़र रहा है। स्थानीय नगर परिषद के चक्कर लगाकर थक चुके हितग्राहियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आरोप है कि नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) नासीर अली इस गंभीर और संवेदनशील मामले में कोई भी ठोस निर्णय लेने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। प्रशासन की इसी ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है और निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।
### **दबंगई पर उतरे कब्ज़ाधारी, रात में पीड़ितों के साथ मारपीट**
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब बीती रात अवैध कब्ज़ाधारियों द्वारा पात्र हितग्राहियों के साथ मारपीट किए जाने की खबर सामने आई। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर वायरल हो रही पोस्टों के दावों के अनुसार, भीम आर्मी से जुड़े कुछ लोगों द्वारा ज़मीन पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए पीड़ित महिलाओं और हितग्राहियों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई है। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र के गरीब परिवारों में भारी आक्रोश और भय का माहौल है।
पुलिस जांच में जुटी।
रात में हुई इस हिंसक झड़प की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि क्या नामली नगर परिषद और राजस्व विभाग अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर सरकारी ज़मीन को कब्जामुक्त कराता है या फिर इन गरीब हितग्राहियों का अपने पक्के मकान का सपना इस प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा।

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