कोल डिपो मामले में बड़ा गड़बड़झाला! उपाध्यक्ष पूजा योगी की शिकायत बेअसर, नगर परिषद ने किया मामला रफा-दफा।



कलेक्टर के आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां, नामांतरण और विकास शुल्क की रसीद पर उठे गंभीर सवाल।

नामली रतलाम मध्यप्रदेश 
दिलीप कर्णधार।

नामली नगर में स्थित कोल डिपो के मामले को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर परिषद की उपाध्यक्ष पूजा योगी द्वारा की गई शिकायत के बावजूद इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से यह प्रकरण अब बड़े गड़बड़झाले के रूप में सामने आ रहा है। स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोल डिपो से जुड़े एक मामले में जिस प्रकार से नामांतरण किया गया और उसके बाद विकास शुल्क की रसीद काटी गई, उसने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया है। नगर परिषद उपाध्यक्ष पूजा योगी ने इस मामले को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई थी और जांच की मांग भी की थी, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि शिकायत के बावजूद नगर परिषद स्तर पर मामले को गंभीरता से लेने के बजाय रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूरे मामले में कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया है। जिस प्रकार से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई और तत्पश्चात विकास शुल्क की रसीद जारी की गई, वह नियमों के विपरीत प्रतीत हो रही है। यही कारण है कि अब यह मामला भ्रष्टाचार की आशंका को और मजबूत कर रहा है।
बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में जिला कलेक्टर द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश भी दिए गए थे कि ऐसे मामलों में नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके बावजूद स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कलेक्टर के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
नगर के जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई तो इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि नामांतरण प्रक्रिया, विकास शुल्क की रसीद और उससे संबंधित दस्तावेजों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल कोल डिपो से जुड़ा यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में इस कथित गड़बड़झाले की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

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