स्पा सेंटर के बंद कमरों में 'थाईलैंड' का खेल: ₹1800 में मसाज और ₹2000 में अस्मत का सौदा, तुलसी वाटर पार्क में 'पाप' के साम्राज्य का भंडाफोड़।

कथित सामाजिक संगठन के रसूख की आड़ में फल-फूल रहा था जिस्मफरोशी का धंधा; SP की टीम ने दबोचा, रसूखदारों द्वारा आरोपी को बचाने की जोड़-तोड़ शुरू; मीडिया की पैनी नजर।

विशेष खोजी रिपोर्ट, नामली (रतलाम) मध्यप्रदेश 

नामली के पंचेड़ रोड स्थित 'तुलसी वाटर पार्क' और उसके भीतर संचालित स्पा (मसाज) सेंटर के बंद कमरों का वो खौफनाक और घिनौना सच सामने आया है, जिसने पूरी धार्मिक नगरी को शर्मसार कर दिया है। मनोरंजन और पर्यटन की आड़ में यहां न केवल अवैध मयखाना (बीयर बार) चल रहा था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का देह व्यापार का सिंडिकेट पैर पसार चुका था। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, इस स्पा सेंटर में 'थाई मसाज' के नाम पर आने वाले ग्राहकों से शुरुआत में एंट्री फीस के रूप में ₹1800 वसूले जाते थे। इसके बाद जब ग्राहक को बंद कमरे में भेजा जाता था, तो वहां थाईलैंड की जवान युवतियों द्वारा शारीरिक संबंध बनाने और सेक्स की भूख मिटाने के एवज में ₹2000 की अतिरिक्त वसूली की जाती थी। यानी मसाज तो सिर्फ एक मुखौटा था, असली खेल जिस्म का सौदा था।

कथित सामाजिक संगठन की आड़ और रसूखदारों का 'कवच'

​इस पूरे रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड दिलीप ठाकुर (इंस्टाग्राम पेज 'नामली मेरी जान' का एडमिन) बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी दिलीप ठाकुर एक कथित रसूखदार सामाजिक संगठन से जुड़ा हुआ है। वह नामली में एक किराए का मकान लेकर रह रहा था और इसी संगठन के रसूख की आड़ में वाटर पार्क के भीतर मयखाना और देह व्यापार का यह काला साम्राज्य चलाकर लाखों रुपए बटोर रहा था। सूत्रों की मानें तो जैसे ही पुलिस कार्रवाई की खबर फैली, वैसे ही संगठन से जुड़े कुछ बड़े रसूखदारों ने दिलीप ठाकुर को बचाने के लिए राजनीतिक और सामाजिक जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। हालांकि, पूरे मामले पर मीडिया की तीखी निगाहें टिकी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

लोकल पुलिस फेल, SP की विशेष टीम ने किया 'गेम ओवर'

​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और विचारणीय सवाल स्थानीय नामली पुलिस पर खड़ा होता है। नामली में रहने वाला एक बाहरी व्यक्ति थाईलैंड से 5 जवान लड़कियों को लाकर देह व्यापार करवा रहा था और स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई थीं? क्षेत्र में चर्चा आम है कि यह पूरा खेल कथित 'मासिक अवैध बंधी' (रिश्वत) के दम पर चल रहा था। यही वजह रही कि स्थानीय पुलिस को इस पूरे ऑपरेशन से पूरी तरह दूर रखते हुए, पुलिस कप्तान की विशेष टीम को खुद मैदान में उतरना पड़ा और महिला पुलिसकर्मियों को फर्जी ग्राहक बनाकर इस पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूत करना पड़ा।


बुद्धिजीवियों की चेतावनी: यूपी के मजदूरों वाला कांड भूले तो नहीं?

​इस सनसनीखेज खुलासे के बाद नामली के प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी वर्ग में भारी आक्रोश है। बुद्धिजीवियों ने नगरवासियों से पुरजोर अपील की है कि वे चंद रुपयों के लालच में आकर अपने मकान किसी भी बाहरी व्यक्ति को किराए पर न दें। मकान किराए पर देने से पहले किराएदार की सामाजिक, पारिवारिक और सबसे महत्वपूर्ण 'अपराधिक पृष्ठभूमि' की बारीकी से जांच करें और उसके सभी जरूरी दस्तावेज नामली थाने में अनिवार्य रूप से जमा करवाएं।

​बुद्धिजीवियों ने याद दिलाया कि अभी पिछले दिनों ही तंबाकू फैक्ट्री में काम करने वाले उत्तर प्रदेश  के संदिग्ध मजदूरों की कहानी का विवाद खत्म भी नहीं हुआ था कि नगर में यह दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर का कांड सामने आ गया। अगर मकान मालिकों ने लापरवाही नहीं छोड़ी, तो शांत और धार्मिक नगरी नामली अपराधियों की शरणस्थली बन जाएगी। फिलहाल पुलिस इस रैकेट के वित्तीय स्रोतों और थाईलैंड की लड़कियों के वीजा नेटवर्क को लेकर गहन जांच कर रही है।

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