नामली थाने की 'तीसरी आंख' शर्मसार: खाकी के पहरे में दुष्कर्म आरोपी ने की आत्महत्या, TI गायत्री सोनी पर गिरी गाज।
अमित कोरी ने संभाला नामली थाने का प्रभार; थाने के इतिहास में पहली बार हवालात में 'डेथ मिस्ट्री', मजिस्ट्रियल जांच शुरू
रतलाम | मध्यप्रदेश
रतलाम जिले के नामली थाने की हवालात में गुरुवार तड़के सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए दुष्कर्म के एक आरोपी ने मौत को गले लगा लिया। पजामे के नाड़े से बने फंदे ने न केवल आरोपी की जान ली, बल्कि पुलिस की अभिरक्षा (Custodial Security) और निगरानी के दावों को भी सरेआम नीलाम कर दिया। जिले के आला अधिकारियों ने इसे घोर लापरवाही माना है, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन थाना प्रभारी गायत्री सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर निरीक्षक अमित कुमार कोरी ने थाने की कमान संभाल ली है।
इतिहास में पहली बार कलंकित हुई नामली पुलिस
नामली थाने के दशकों पुराने इतिहास में यह पहला मौका है जब हवालात के भीतर किसी बंदी ने आत्महत्या की है। आरोपी (38 वर्ष) पर उसकी अपनी ही 16 वर्षीय नाबालिग बेटी ने दुष्कर्म का कलंक लगाया था। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में पुलिस ने बुधवार रात उसे हिरासत में लिया था। रात 2 बजे तक वह जागता रहा, लेकिन सुबह 4 बजे उसकी लाश फंदे पर झूलती मिली।
कानून की कसौटी पर पुलिस की चूक
पुलिस अभिरक्षा में मौत (Custodial Death) के मामले में सुप्रीम कोर्ट की 'डी.के. बासु' गाइडलाइंस और CRPC की धारा 176(1A) के कड़े प्रावधान हैं:
- सुरक्षा तलाशी (Search Protocol): हवालात में भेजने से पहले आरोपी के पास से नाड़ा, बेल्ट या डोरी जैसी वस्तुएं जब्त करना अनिवार्य था। यहाँ पुलिस इस बुनियादी नियम में विफल रही।
- निगरानी (Sentry Duty): थाने के सीसीटीवी कैमरों और बाहर तैनात संतरी की मौजूदगी के बावजूद आरोपी ने फंदा कैसे तैयार कर लिया? यह जांच का सबसे बड़ा बिंदु है।
पोस्टमार्टम के बाद हुआ अंतिम संस्कार
गुरुवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शव का पंचनामा कर उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया। डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम किए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शाम को कड़ी सुरक्षा के बीच मृतक का दाह संस्कार कर दिया गया।
ससुराल और परिवार के बीच 'इन्वेस्टिगेशन' की सुई
पुलिस इस मामले में केवल आत्महत्या के पहलू पर ही नहीं, बल्कि 'मानसिक उत्पीड़न' के कोण से भी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने अपराधबोध में यह कदम उठाया या फिर ससुराल पक्ष और परिवार के बीच चल रहे किसी आपसी विवाद के दबाव में आकर उसने खुदकुशी की।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
घटना के बाद एडिशनल एसपी और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, थाना प्रभारी पर कार्रवाई तो केवल शुरुआत है; ड्यूटी पर तैनात संतरी और राइट राइटर पर भी विभागीय जांच की तलवार लटक रही है। जिले के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अन्य दोषियों पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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