इप्का फैक्ट्री से 36 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए महेश पोरोणिक, बैंड-बाजों और सहभोज के साथ हुआ ऐतिहासिक स्वागत।
इप्का फैक्ट्री से 36 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए महेश पोरोणिक, बैंड-बाजों और सहभोज के साथ हुआ ऐतिहासिक स्वागत।
इप्का लेबोरेटरीज लिमिटेड (दवाई कंपनी) से 60 वर्षीय वरिष्ठ कर्मचारी महेश पोरोणिक (पिताजी: श्री इंद्रमल जी पोरोणिक) के सेवानिवृत्त (रिटायर) होने पर परिजनों और स्नेहीजनों ने मिलकर एक यादगार विदाई समारोह का आयोजन किया। 36 वर्ष और 6 महीने की लंबी व सफल सेवाओं के बाद जब वे 5 जून को कंपनी से बाहर निकले, तो पूरा माहौल भावुकता और उत्साह से भर गया। श्री महेश जी को लेने के लिए उनके परिवार के सदस्य और शुभचिंतक फोरलेन रोड़ सेजावता स्थित इप्का फैक्ट्री पहुंचे। वहां से उन्हें बैंड-बाजों के साथ, फूल-मालाएं पहनाकर और शाल ओढ़ाकर बड़े ही धूमधाम से लाया गया। इस भव्य चल समारोह और उसके बाद आयोजित सहभोज (प्रीतिभोज) में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और सहकर्मी शामिल हुए।
मजदूरी से शुरुआत कर तय किया सफलता का सफर
महेश पोरोणिक का जीवन संघर्ष और प्रेरणा से भरा रहा है। हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने शुरुआती दिनों में पशुपालन किया और अन्य जगहों पर मजदूरी में भी अपनी किस्मत आजमाई। कठिन परिश्रम के दम पर वर्ष 1989 में वे इप्का फैक्ट्री में स्थायी (परमानेंट) कर्मचारी के रूप में नियुक्त हुए। उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ कंपनी में एक 'वर्कमेन' के रूप में अपनी सेवाएं पूरी कीं।
कर्मचारियों के बीच लोकप्रिय: विदाई पर छलके आंसू
अपने मिलनसार और सहयोगात्मक स्वभाव के कारण महेश जी कर्मचारियों के बीच बेहद लोकप्रिय रहे। विदाई के समय उनके साथ काम करने वाले साथी कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं और कई भावुक हो उठे। अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों की सोसाइटी के अध्यक्ष का कार्यभार भी लगातार 4 वर्षों तक पूरी जिम्मेदारी से निभाया।
खेल और सामाजिक गतिविधियों में भी मनवाया लोहा।
महेश पोरोणिक केवल काम में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और खेल गतिविधियों में भी हमेशा आगे रहे। उन्होंने क्रिकेट, वॉलीबॉल, कबड्डी, मटकी फोड़ आयोजनों और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्षेत्र के आमजन के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी इस ऐतिहासिक विदाई पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और इप्का स्टाफ ने उनके सुखद, स्वस्थ और दीर्घायु सेवानिवृत्त जीवन की कामना की है।
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