चौरासी बड़ायला में गूंजे मां अंबाजी के जयकारे,भागवत कथा का श्रवण करने पहुंच रहे श्रद्धालु।
चौरासी बड़ायला में गूंजे मां अंबाजी के जयकारे,भागवत कथा का श्रवण करने पहुंच रहे श्रद्धालु।
ठाकुर जीवन सिंह शेरपुर ने किए मां अंबाजी के दर्शन; बोले- 'शिखर निर्माण में देंगे पूरा सहयोग', 18 मई को भंडारे के साथ थमेगा भक्ति का कारवां
नामली/ जावरा मध्यप्रदेश चौरासी बड़ायला (फोरलेन मार्ग)।
क्षेत्र के सुप्रसिद्ध चकाचक आश्रम स्थित अंबाजी मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा सप्ताह के पांचवें दिन भक्ति का ज्वार उफन पड़ा। फोरलेन रोड पर स्थित इस पवित्र धाम में चल रहे भव्य शिखर निर्माण और ज्ञान यज्ञ का गवाह बनने के लिए चौरासी बड़ायला सहित आस-पास के ग्राम से श्रद्धालु कथा श्रवण करने आ रहे हैं।
चमत्कारी है मां की प्रतिमा, शिखर निर्माण में करेंगे पूर्ण सहयोग: जीवन सिंह शेरपुर
कथा के पांचवें अध्याय के पावन प्रसंग पर करणी सेना परिवार के प्रमुख ठाकुर जीवन सिंह शेरपुर मुख्य अतिथि के रूप में चकाचक आश्रम पहुंचे। उन्होंने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शेरपुर ने कहा, "यह मां अंबाजी की अत्यंत चमत्कारी प्रतिमा है, जिसे देवलोकवासी चकाचक महाराज ने अपने कर-कमलों से स्थापित किया था। इस दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता।" उन्होंने मंदिर के भव्य शिखर निर्माण की सराहना करते हुए संकल्प लिया कि इस पावन कार्य में उनके परिवार और संगठन की ओर से हरसंभव ऐतिहासिक मदद की जाएगी।
महंत राजेंद्र पुरी की अगुवाई में बही ज्ञान की गंगा।
धार्मिक रूप से बेहद जाग्रत इस क्षेत्र में यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब भक्तों और क्षेत्रवासियों के सामूहिक सहयोग से अंबाजी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राजेंद्र पुरी 'चकाचक' द्वारा इस भव्य कथा का आयोजन कराया जा रहा है। महंत श्री ने भक्तों से आह्वान करते हुए कहा कि चकाचक आश्रम में इन दिनों साक्षात ज्ञान की गंगा बह रही है। सनातन संस्कृति को मजबूत करने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए प्रत्येक हिंदू को इस कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए।
सोमवार को महाप्रसादी के साथ होगा भव्य समापन
कथा पंडाल में प्रतिदिन उमड़ रही महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भारी भीड़ से पूरा माहौल 'जय माता दी' और 'जय श्री कृष्ण' के उद्घोष से गुंजायमान है। इस सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का समापन आगामी 18 मई (सोमवार) को मुख्य पूर्णाहुति के साथ होगा। कथा के विश्राम के बाद विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।
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