धार्मिक चोले में नामली को दागदार करने वाले 3 आरोपी जेल भेजे गए; कार्रवाई में नामली पुलिस बाईपास, उठ रहे गंभीर सवाल।
धार्मिक चोले में नामली को दागदार करने वाले 3 आरोपी जेल भेजे गए; कार्रवाई में नामली पुलिस बाईपास, उठ रहे गंभीर सवाल
विशेष संवाददाता, नामली (रतलाम)
धार्मिक नगरी नामली को बदनाम करने वाले तुलसी वॉटर पार्क अवैध स्पा और देह व्यापार मामले में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम हुआ। पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद दोपहर (लंच के बाद) तीनों आरोपियों को जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए।
लेकिन इस पूरी अदालती कार्रवाई के समानांतर, पर्दे के पीछे की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल ने इस मामले को भोपाल से लेकर दिल्ली तक गरमा दिया है। पुलिस की कार्यप्रणाली, सूचना संकलन (इंटेलिजेंस) और अंदरूनी खींचतान को लेकर अब कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं: एसडीओपी को किया बाईपास, अपनी टीम से कराई छापेमारी
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिले के कप्तान (एसपी) अमित कुमार ने नामली थाने के एसडीओपी किशोर पाटनवाला को इस बड़ी कार्रवाई की भनक तक नहीं लगने दी। उन्हें पूरी जानकारी से दूर रखते हुए दूसरे पुलिस लोकेशन पर तैनात कर दिया गया। शनिवार को एसपी द्वारा क्षेत्रीय उच्च अधिकारियों को दबिश का अवसर तो दिया गया, लेकिन स्थानीय तंत्र पर भरोसा न करते हुए पूरी छापेमारी एसपी की विशेष टीम द्वारा गुपचुप तरीके से अंजाम दी गई।
इस कदम ने साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस का सूचना संकलन (इंटेलिजेंस) पूरी तरह फेल साबित हुआ था। जो अनैतिक खेल दो साल से 'नामली मेरी जान' इंस्टाग्राम पेज के जरिए और थाईलैंड की युवतियों को बुलाकर खेला जा रहा था, उसकी भनक स्थानीय बीट और थाने को क्यों नहीं लगी, यह जांच का विषय है।
लाखों की लेन-देन और राजनीतिक दबाव की चर्चाएं गर्म
मामला उजागर होने के बाद से ही प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में भारी दबाव देखा जा रहा है। सूत्रों के हवाले से बेहद सनसनीखेज खबर सामने आ रही है कि सोमवार को इस मामले को दबाने या कमजोर करने के लिए करीब 25 लाख रुपए के लेन-देन का खेल हुआ है।
चर्चा यह भी है कि सत्ता पक्ष और रसूखदार लोग इस मामले में कुछ और ही मोड़ चाहते हैं। यही वजह है कि इतना बड़ा देह व्यापार और फॉरेनर एक्ट का मामला सामने आने के बावजूद तुलसी वॉटर पार्क पर अब तक कोई स्थाई प्रशासनिक तालाबंदी या बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है और वह अब भी खुला हुआ है।
भोपाल से दिल्ली तक हलचल, एसपी का मिशन सवालों के घेरे में
एक तरफ जहां आरोपियों—मुख्य सरगना धार्मिक दिलीप ठाकुर, नरेश चौहान (पाली, राजस्थान) और भरत (जोधपुर)—को जेल भेज दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ इस कांड की गूंज भोपाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में सुनाई दे रही है।
स्थानीय पुलिस के खुफिया तंत्र की इस विफलता और भारी-भरकम लेन-देन के आरोपों ने जिले में कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। आलोचकों का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ जिले के कप्तान का जो 'मिशन' था, वह इस संगठित रैकेट, स्थानीय पुलिस की नाकामी और सत्ता के कथित संरक्षण के आगे फेल होता नजर आ रहा है। फिलहाल फरार आरोपी योगेश सिंह की तलाश और थाई युवतियों के स्पॉन्सरों के नामों का खुलासा होना बाकी है, जिससे कई और बड़े चेहरों बेनकाब हो सकते हैं।
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