वार्ड-4 का मामला: रहवासियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; मानसून सिर पर, बेपरवाह सीएमओ और जल समिति पर उठाए सवाल।
नामली में फूटा जनाक्रोश: नाले पर अवैध कब्जे से थमी जल निकासी, सरकारी दफ्तरों और अस्पताल पर भी डूबने का खतरा।
वार्ड-4 का मामला: रहवासियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; मानसून सिर पर, बेपरवाह सीएमओ और जल समिति पर उठाए सवाल।
नामली। (ब्यूरो रिपोर्ट)
नगर के वार्ड क्रमांक 4 स्थित शीतलामाता पलदुना रोड पर मुख्य नाले पर किए गए अवैध कब्जे को लेकर क्षेत्रवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। मानसून के ठीक पहले जल निकासी व्यवस्था ठप होने से नाराज रहवासियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नाले से तत्काल अतिक्रमण हटाने और जल निकासी को सुचारू करने की पुरजोर मांग की है।
अवैध निर्माण से नाला चोक, मंडरा रहा बीमारियों का खतरा
क्षेत्रवासियों का सीधा आरोप है कि कुछ रसूखदार स्थानीय लोगों द्वारा नाले की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है। इस वजह से मुख्य नाला पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है। गत वर्ष भी बारिश के दौरान यहां जलभराव की बेहद गंभीर स्थिति बन गई थी।
रहवासियों ने बताया:"पिछले कई वर्षों से गंदा पानी एक जगह जमा होने के कारण इलाके में मच्छरों का भयंकर प्रकोप बढ़ गया है। क्षेत्र में डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।"
जब सरकारी इमारतें ही हो जाती हैं जलमग्न!
यह समस्या सिर्फ वार्ड क्रमांक 4 तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इतिहास पुराना है। वार्ड नम्बर 15 स्टेशन रोड का यह नाला गांव बसने के समय और ग्राम पंचायत के जमाने से आम लोगों की निजी भूमि पर बना हुआ है। वार्ड नंबर 15 में भी वार्डवासियों ने निजी खर्च पर अपने मकानों के आगे जैसे-तैसे नाले का निर्माण कराया है।हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद नामली और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जैसी दो प्रमुख शासकीय इमारतों के निर्माण के बाद से यह समस्या और विकराल हो गई है। हर बारिश में नगर परिषद कार्यालय और नामली अस्पताल खुद पानी में डूब जाते हैं, लेकिन आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
6 महीने पहले बननी थी कार्ययोजना, जिम्मेदार सीएमओ रहे बेपरवाह।
नियमों के मुताबिक, मानसून में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए करीब 6 महीने पहले ही ठोस कार्ययोजना तैयार हो जानी चाहिए थी। लेकिन क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जिम्मेदार सीएमओ नासीर अली और नगर परिषद की जल समिति के मुख्य पार्षदों ने इस गंभीर मुद्दे पर जरा भी ध्यान नहीं दिया। नगर परिषद को पूर्व में कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब नगर की अन्य नालियों का पानी भी इसी चोक नाले में छोड़े जाने से हालात बद से बदतर हो चुके हैं।
प्रशासन को अल्टीमेटम: 'कार्रवाई नहीं तो होगा जन आंदोलन'।
रहवासियों ने कलेक्टर से गुहार लगाते हुए अपनी प्रमुख मांगें सामने रखी हैं:
- तत्काल जांच: राजस्व विभाग की विशेष टीम भेजकर नाले की भूमि पर हुए अवैध कब्जे की पैमाइश और जांच कराई जाए।
- अतिक्रमण पर चले बुलडोजर: मानसून की पहली बारिश से पहले हर हाल में अतिक्रमण हटाया जाए।
- सफाई और चौड़ीकरण: नाले की गहरी सफाई कर उसका चौड़ीकरण किया जाए ताकि पानी का बहाव सुचारू हो सके।साफ चेतावनी: स्थानीय नागरिकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो वे उग्र जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन की होगी।वार्ड नम्बर 4 के गत वर्ष यह हालात थे।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें