लापरवाही ने ली जान: नामली में झूलते तारों की चपेट में आने से किसान की दर्दनाक मौत, बिजली विभाग पर भड़के ग्रामीण बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं नगर में नीचले स्तर पर झूल रहे हाई वोल्टेज तार और जलमग्न होने वाली विद्युत डीपियाँ; मानसून से पहले प्रशासन की पोल खुली ।


बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं नगर में नीचले स्तर पर झूल रहे हाई वोल्टेज तार और जलमग्न होने वाली विद्युत डीपियाँ; मानसून से पहले प्रशासन की पोल खुली

नामली/रतलाम मध्यप्रदेश

नगर में बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया। बुधवार दोपहर नामली में बिजली विभाग की उदासीनता के चलते एक 42 वर्षीय किसान की हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वहीं ग्रामीणों में विद्युत मंडल के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक के भाई संतोष पड़ियार ने बताया कि आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए वे सभी भाई दोपहर करीब अपने खेत पर कुछ काम कर रहे थे. इस दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई टेंशन लाइन, जो कि काफी समय से नीचे झूल रही थी, अचानक चली तेज हवा के कारण नीचे की तरफ लहराई। बड़े भाई भंवरलाल पड़ियार (42 वर्ष, कुमावत) का सिर इन झूलते तारों की चपेट में आ गया। हादसा 
 इतना जोरदार था कि भंवरलाल कुमावत बुरी तरह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तुरंत उपचार के लिए रतलाम ले जाने को दौड़े, लेकिन दुर्भाग्यवश मेडिकल कॉलेज उपचार के दौरान मौत हो गई।सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है और मामले की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। चेतावनी के बाद भी नहीं चेते अफसर इस हादसे ने बिजली विभाग के सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि झूलते तारों की शिकायत कई बार की गई, लेकिन विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। इस घटना से एक बार फिर साबित हो गया है कि विभागीय लापरवाही के कारण असमय ही किसी परिवार का मुखिया, पति, पिता या बेटा मौत के आगोश में समा जाता है, और पीछे छूट जाते हैं रोते-बिलखते परिजन।
आगामी मानसून में बड़े हादसों का अंदेशा यह हादसा तो महज एक बानगी है; आने वाले बरसात के मौसम में नामली नगर के कई इलाकों में बड़े बिजली हादसों का खतरा मंडरा रहा है। जलमग्न होने वाली विद्युत डीपियाँ: नगर के फोरलेन रोड़ क्षेत्र नए बस स्टैंड परिसर और सड़क किनारे लगी विद्युत डीपी (ट्रांसफार्मर) का हाल सबसे बदतर है। अधिक बारिश होने पर पूरा बस स्टैंड परिसर जलमग्न हो जाता है, जिसके साथ ये डीपियाँ भी पानी में डूब जाती हैं। वायरल तस्वीरों से भी नहीं लिया सबक: पिछले वर्ष भी भारी बारिश के दौरान पानी में डूबी इन डीपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं, लेकिन विभाग ने इससे कोई सबक नहीं लिया।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: नगर में जहाँ-जहाँ भी विद्युत सप्लाई के लिए डीपी लगाई गई हैं, वहाँ आम नागरिकों की सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बिना फेंसिंग और सुरक्षा घेरे के ये डीपियाँ राहगीरों और मवेशियों के लिए साक्षात काल बनी हुई हैं। वर्षा काल से पहले सुधरे व्यवस्था: स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और विद्युत मंडल के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि मानसून की दस्तक से पहले पूरे नगर में झूलते तारों को कसा जाए और जलमग्न होने वाली डीपियों को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट किया जाए, ताकि भविष्य में भंवरलाल जैसे किसी अन्य मासूम की जान न जाए।

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