तुलसी वाटर पार्क में थाईलैंड की युवतियों से देह व्यापार मामले में पुलिस की साख पर सवाल: जिस थाना प्रभारी को लापरवाही पर मिला था नोटिस, एसपी ने उसी को सौंप दी दोबारा जांच‌।

तुलसी वाटर पार्क में थाईलैंड की युवतियों से देह व्यापार मामले में पुलिस की साख पर सवाल: जिस थाना प्रभारी को लापरवाही पर मिला था नोटिस, एसपी ने उसी को सौंप दी दोबारा जांच‌।

 नामली/रतलाम मध्यप्रदेश 



धार्मिक नगरी नामली को शर्मसार करने वाला एक बेहद घिनौना और सनसनीखेज मामला सामने आया है। पंचेड़-नामली मार्ग पर स्थित 'तुलसी वाटर पार्क' में स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय देह व्यापार (इंटरनेशनल सेक्स रैकेट) का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस की छापेमारी में थाईलैंड की तीन विदेशी युवतियों को बरामद किया गया है, जिन्होंने मोबाइल ट्रांसलेटर के जरिए पूछताछ में यह कबूला कि उनसे मोटी रकम लेकर देह व्यापार कराया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने वाटर पार्क मैनेजर और वर्तमान नामली निवासी दिलीप ठाकुर, स्पा संचालक नरेश चौहान (निवासी पाली, राजस्थान) और मैनेजर भरत मेवाड़ा (निवासी जोधपुर) को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य मालिक योगेश सिंह डाबी (निवासी रतलाम) फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
इस पूरे घिनौने खेल के पीछे वाटर पार्क के मैनेजर दिलीप ठाकुर (पुत्र प्रहलाद सिंह ठाकुर) की एक सोची-समझी रणनीति सामने आई है। दिलीप ने इंस्टाग्राम पर "नामली मेरी जान" नाम से एक पेज बनाया था, जिसके बहुत ही कम समय में 19 हजार से अधिक फॉलोअर्स हो गए थे। इस पेज के जरिए उसने आम जनता और स्थानीय लोगों का भरोसा जीता। खुद को एक सामाजिक संगठन का कर्मठ सिपाही दिखाकर वह रसूखदारों के बीच पैठ बना रहा था। यहाँ तक कि उसका मुख्यमंत्री मोहन यादव को ज्ञापन सौंपते हुए और पुराना प्रेस कार्ड लिए तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसी लोकप्रियता की आड़ में उसने बच्चों और परिवारों के मौज-मस्ती के केंद्र 'तुलसी वाटर पार्क' को देह व्यापार का अड्डा बना दिया।
एसपी अमित कुमार का 'सीक्रेट ऑपरेशन', भनक तक नहीं लगी स्थानीय पुलिस को सूत्रों के अनुसार, नामली थाने से महज 6 किलोमीटर दूर चल रहे इस अवैध धंधे की भनक जिला पुलिस कप्तान (एसपी) अमित कुमार को पहले से ही थी। उन्होंने सही समय का इंतजार किया और स्थानीय नामली पुलिस को पूरी तरह लूप से बाहर रखा। एसपी ने साधारण कपड़ों में महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम तैयार की। कुछ महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सादी ड्रेस में पहले से ही वाटर पार्क में भेजा गया। निश्चित समय पर कप्तान का इशारा मिलते ही टीम ने तुलसी वाटर पार्क के पीछे बने छह गुप्त कमरों में छापेमारी कर दी। जब तीन थाईलैंड की युवतियों और आरोपियों को पकड़कर नामली थाने लाया गया, तब जाकर थाना प्रभारी अमित कोरी और पंचेड़ बीट प्रभारी को इस कार्रवाई की जानकारी मिली।
कमरे के डस्टबीन से मिले बड़ी संख्या में प्रयुक्त कंडोम
पुलिस की तलाशी के दौरान वाटर पार्क के कमरों और डस्टबीन से बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए गए कंडोम और नए पैकेट बरामद हुए हैं। इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल भी जब्त किए गए हैं, जिनकी तकनीकी जांच चल रही है। वहीं सुत्र बताते हैं कि तुलसी वाटर पार्क में लगे कैमरों की फुटेज भी पुलिस ने हासिल कर ली।
टूरिस्ट वीजा पर आईं,दो दिन पहले ही खत्म हो चुकी थी अवधि।पुलिस प्रशासनिक सुत्रो से प्राप्त जानकारी अनुसार जांच में सामने आया है कि तीनों विदेशी युवतियां जयपुर के रास्ते रतलाम पहुंची थीं। वे भारत में टूरिस्ट वीजा पर आई थीं, जिन्हें बहला-फुसलाकर और दबाव बनाकर इस अवैध धंधे में धकेला गया। स्पा सेंटर में आने वाले ग्राहकों से मसाज के नाम पर प्रति ग्राहक दो हजार या उससे मनचाही रकम वसूली जाती थी। फिर जिस्मफरोशी और हवस मिटाने के लिए तीन हजार रुपए प्रति हवस की भूख मिटाने वाले ग्राहकों से वसूलें जातें थे।चौंकाने वाली बात यह है कि तीन में से एक युवती के वीजा की अवधि दो दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। फिलहाल तीनों युवतियों का मेडिकल चेकअप करवाकर उन्हें 'वन स्टॉप सेंटर' भेज दिया गया है और मेडिकल चेकअप में भी कोई तथ्य निकलकर सामने आ सकते हैं और थाईलैंड दूतावास से भी संपर्क किया जा रहा है।
प्रशासनिक चूक: जिसे नोटिस दिया, उसी को सौंप दी जांच; उठे सवाल। 
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। छापेमारी के तुरंत बाद एसपी अमित कुमार ने घोर लापरवाही बरतने के आरोप में नामली थाना प्रभारी अमित कोरी और बीट प्रभारी को कारण बताओ (शोकाज) नोटिस जारी किया था। नियमानुसार, महिलाओं से जुड़े इस संवेदनशील मामले की शुरुआती जांच रतलाम शहर की महिला थाना प्रभारी को सौंपी गई थी। लेकिन, बाद में इस केस की डायरी और विवेचना पुनः नामली टीआई अमित कोरी के हाथों में सौंप दी गई। इस प्रशासनिक फेरबदल से जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग) और विदेशी नागरिकों का अवैध रूप से ठहरना है, लेकिन स्थानीय पुलिस की सुस्ती के कारण जयपुर से रतलाम तक के लोकल फैसिलिटेटर्स (मददगारों) का नेटवर्क अभी तक बेनकाब नहीं हो सका है। केस डायरी में गंभीर कमियां, आरोपियों को मिल सकती है राहत।सरकारी वकील संजीव सिंह चौहान ने बताया कि न्यायालय में प्रस्तुत की गई केस डायरी में कई तकनीकी खामियां और त्रुटियां सामने आई हैं। स्पा सेंटर के एग्रीमेंट पेपर पर 'योगिता सिंह' का नाम दर्ज है, जो मुख्य फरार आरोपी योगेश सिंह की बहन बताई जा रही हैं। नरेश चौहान के मेमोरेंडम कथन में भी योगिता सिंह का नाम आया है, लेकिन इसके बावजूद केस डायरी में योगिता और योगेश सिंह के भाई-बहन के संबंधों को स्थापित करने वाले आवश्यक दस्तावेज पुलिस ने संलग्न नहीं किए। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की इस ढीली लिखापढ़ी और लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपियों को कोर्ट से राहत मिल सकती है। बुधवार को द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के प्रति सख्त रुख अपनाया। मुख्य आरोपी योगेश सिंह (निवासी बरवड़ रोड) की अग्रिम जमानत याचिका और गिरफ्तार आरोपी नरेश चौहान, भरत मेवाड़ा व दिलीप सिंह की नियमित जमानत याचिकाओं को न्यायालय ने प्रथम दृष्टया अपराध को गंभीर मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि मामले की निष्पक्ष और पूरी विवेचना के लिए आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है। 
मुख्यमंत्री को पूर्व में माग पत्र सौंपता हुआ तुलसी वाटर पार्क स्पा सेंटर का मेनेजर दिलीप ठाकुर।

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