कलेक्टर साहब से बात कराओ,वरना नहीं उठेंगे !'... रतलाम के सिखेड़ी स्कूल में बच्चों का"हल्लाबोल",जर्जर छतों से डरे नौनिहालों ने संभाला मोर्चा।
कलेक्टर साहब से बात कराओ, वरना नहीं उठेंगे!'... रतलाम के सिखेड़ी स्कूल में बच्चों का "हल्लाबोल", जर्जर छतों से डरे नौनिहालों ने संभाला मोर्चा।
धमकी,गंदगी और धोखा: वादों की 'बरसात' में टपकती रही स्कूल की छत, तो किताबों की जगह धरने की तख्तियां थाम सड़क पर उतरे छात्र और अभिभावक।
नामली/रतलाम । मध्यप्रदेश
वो हाथ जिन्हें पेन और कॉपी संभालनी थी, आज उनमें प्रशासन के खिलाफ गुस्से की तख्तियां हैं। वह जुबान जिससे कविताएं गूंजनी चाहिए थीं, आज वहाँ एक ही नारा है—"अब आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए!"
रतलाम जिले का सिखेड़ी शासकीय माध्यमिक विद्यालय... जहाँ बच्चे रोज़ पढ़ने नहीं, बल्कि अपनी जान हथेली पर रखकर 'संघर्ष' करने आते हैं। जर्जर स्कूल भवन की टपकती छतों और खोखले वादों से तंग आकर आखिरकार आज मासूमों के सब्र का बांध टूट गया। बच्चों ने पढ़ाई छोड़, स्कूल के गेट पर ताला जड़ा और अपनी मांगों को लेकर सड़क पर डट गए।
'साल बदला, पर हालात नहीं' — वादों की खुली पोल।
गवाह हैं वो मासूम चेहरे, जो पिछले साल भी इसी उम्मीद में धरने पर बैठे थे कि साहब आएंगे और नई चमचमाती बिल्डिंग देंगे। तब अधिकारियों ने मीठी बातों का मरहम लगाया था, लेकिन पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी स्कूल की इमारत वैसी ही बदहाल है। इस बार बच्चों का रुख साफ था—"पिछली बार मान गए थे, इस बार बिना ठोस कार्रवाई के कदम पीछे नहीं हटेंगे।"
शिकायतों का 'कच्चा चिट्ठा': जब अफसरों के सामने खुली पोल।
तहसीलदार आशीष उपाध्याय और शिक्षा विभाग के आला अफसर जब प्रदर्शनकारियों को शांत कराने पहुंचे, तो उन्हें बच्चों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। छात्र सीधे जिले के मुखिया (कलेक्टर) से बात करने की मांग पर अड़ गए। काफी मान-मनौव्वल के बाद जब बातचीत शुरू हुई, तो स्कूल व्यवस्था की जो काली सच्चाई सामने आई, उसने अफसरों को भी सन्न कर दिया।
भय का साया: सिर पर मंडराती जर्जर छत और अधूरी पड़ी नई बिल्डिंग का निर्माण। अमानवीय व्यवहार: ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों से मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) के बर्तन धुलवाए जाते हैं। मूलभूत संकट:पीने के साफ पानी की किल्लत और बदबू मारते शौचालय।
धमकी राज: आवाज़ उठाने या शिकायत करने पर बच्चों को स्कूल से निकालने (TC काटने) की सीधी धमकी।
अधिकारियों का दावा: मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अमले ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि लापरवाही हुई है। उन्होंने दोषी शिक्षकों और मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले स्व-सहायता समूह पर सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया है।
बड़ा सवाल: व्यवस्था कब सुधरेगी?
सिखेड़ी के इन बच्चों ने आज सिर्फ एक स्कूल के खिलाफ मोर्चा नहीं खोला है, बल्कि पूरी लचर शिक्षा व्यवस्था के गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ा है। अब देखना यह है कि क्या हर बार की तरह इस बार भी इस आक्रोश को 'कार्रवाई के आश्वासन' के ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर इन बच्चों को सुरक्षित भविष्य और सम्मान के साथ पढ़ने का अधिकार मिलेगा?
रतलाम प्रशासन पर अब पूरे प्रदेश की नजरें हैं!
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